" वहाँ " और " अब "


कभी लिखा होता था खून से इंक़लाब वहाँ,
अब खून से सिर्फ कर्ज़ लिखा हुआ रहता है।।

कभी हुआ करती थी पसीने की कमाई वहाँ,
अब पसीने पर तो आरक्षण भारी पड़ता है।।

कभी होती थी एकजुटता की मिसालें वहाँ,
अब धर्म पर राजनीति का वर्चस्व चलता है।।

कभी देवीयों सी पूजी जाती थी लाड़की वहाँ,
अब बिगड़े शहज़ादों का उनपर हक़ जमता है।।

कभी दोस्तों और रिश्तों में बहता था प्रेम वहाँ,
अब रिश्ता इंसानियत तक का कत्ल करता है।।

कभी शौर्य की गाथाएँ सुनाई जाती थी वहाँ,
अब साक्षात्कारों में भी बस स्कैम बसता है ।।

कभी आध्यात्म पर संगोष्टी हुआ करती थी वहाँ,
अब संतों का नही बाबाओं का वक़्त बहता है।।

कभी लेखन में आज़ादी का जोश रहता था वहाँ,
अब अनपढ़ तक भी यहां लिखने दम भरता है।।

#_Parul 








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