वेलेंटाइंस डे की कहानी....

★ हम वेलेंटाइंस डे मनातें ही क्यों है, कुछ पता भी है ???


◆ नही, कोई खास कहानी है क्या इसके पीछे???


★ हाँ हाँ, 3 कहानियाँ बड़ी प्रचलित है बाबा वेलेंटाइन की, I mean संत वेलेंटाइन की..


◆ओह, कौनसी 3 कहानियां?


★ ~ पहली के अनुसार तो, रोम के "राजा क्लाउडियस II" ने अपनी सेना में सभी बिन ब्याहे मर्दों को नौरकी दी और माना कि शादीशुदा मर्द देश की रक्षा सही से नही कर सकते, इसलिए उन्होंने सभी जवान मर्दों की शादी पर रोक लगा दी..

◆ तो फिर, फिर क्या हुआ??

★होना क्या था, बाबा वेलेंटाइन ने सभी की चुपके से शादी करवाने लगे और जब ये बात राजा को पता चली तो उसने बाबा वेलेंटाइन को मृत्युदंड दे दिया..

◆ अच्छा और दूसरी कहानी क्या कहती है?

★ ~ दूसरी के अनुसार तो रोमन राजाओं के अत्याचारों से बचने के लिए बाबा वेलेंटाइन सभी क्रिश्चियनस की मदद कर रहे थे और जब उन्हें जेल में डाला गया तो अपनी प्रेमिका को उन्होंने पहले खत लिखा था जो कि शायद जेलर की ही बेटी थी..

◆तो फिर ?

★ फिर क्या उन्होंने ख़त में पहली बार लिखा था " From your valentine " आज भी लोग ख़तों में यही लिखते हैं... उनके इश्क़ के कारण ही लोग ये दिन मनाते हैं..

◆ तो फिर 3री कहानी क्या कहती है ???

★ कुछ लोग वेलेंटाइंस के मृत्य के दिन को वेलेंटाइंस डे मनाया जाता है,

★ ~ पर तीसरी कहानी के अनुसार जो थोड़ी विभस्य है, माना जाता है कि रोमन साम्राज्य के लोग (जनक) एक गुफा में इखट्टे होते थे, जहां रोमन पंडित लोग कुत्ते या बकरी की बलि देते थे, और बाकी के लहू (खून) को अपने खेत और अपनी घर की लड़कियों को छुआते थे,

◆ क्यों, बकरी के खून को खेत मे क्यों डालते थे वो और लड़कियों की क्यों छूना पड़ता था उसे ????

★ ताकि लड़कियों की प्रजनन शक्ति और फसलों का उपजाऊपन बढ़ जाए... वैसे 5वी सदी में पोप ने 14th फरवरी को संत वेलेंटाइन की मृत्य का दिन घोषित किया था..

◆ हद्द है, की बेज़ुबान के खून से प्रजनन शक्ति कैसे बढ सकती है, ये तो बहुत ही बुरा है... और इसे वहाँ वेलेंटाइनस डे के रूप में मनाया जाता था..

★ क्या कर सकते हैं जो है वो तो यही है, और भी कई कहानियां है पर ये 3 प्रमुख है, खैर कोई बात नही,

★ तुम्हे भी बाबा वेलेंटाइन की "पुण्यतिथि" की बहुत बहुत शुभकामनाएं 💐💐





Comments

  1. यही सत्य है ... पर आधा अधूरा ज्ञान रखनें वालों की पहचान होती है कि वे सिर्फ चकाचौंध में अन्धे हो जातें हैं और भटक जातें हैं स्वयं से ही ..!
    इसलिए इस तरह के कुकुरमुत्ते जैसे दिवसो मे अपनी स्वाभाविकता भूल जातें हैं ..!

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    1. बस यही समस्या है ज्यादातर युवा पीढ़ी के साथ सर, जो घट रहा है क्यों घट रहा है वजह क्या है वो जानना नही चाहते...

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  2. यदि यही सत्य है तो क्यूँ हम लोग दूसरों की परम्पराओं को ना अपनाकर अपने रीति रिवाजों को अपनायें जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी को हमसे कुछ सीख मिल सके जैसे की हम लोगों को अपनी पीढ़ियों से मिलती आयी हैं और हम अपने रीतिरिवाजों को अच्छें से मनाने का प्रयास करें l

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