" आँखों की बातें "
बेटी- माँ मैं जा रही हूँ.. छुट्टी मिली तो जल्दी आउंगी... ( अपनी बेटी की तीखी सी आवाज़ सुन, माँ किचन से निकल दौड़ती आई और बोली...) माँ - हज़ार बार कहा है तुझे, जा रही हूँ नही, आती हूँ बोला कर.. ( इसपर फिर बेटी अपनी तीखी सी आवाज़ में कहती है..) बेटी- अच्छा सॉरी ना माँ.. अगली बार से पक्का यही बोलूँगी.. अब मुझे जाने दो..वर्ना आखरी बस भी निकल जाएगी.. ( तब माँ एक गहरी सांस लिए कहती है ) माँ- अच्छा सुन..... ( deep silence { शांति } ) ( कुछ देर के लिए मानो , सबकुछ थम सा गया, सबकुछ शांत, माँ - बेटी ने भी शब्दों से ऊपर हो रही, आँखों की बातों को ज्यादा तवज़्ज़ो दी .. एक दूसरे के लिए, फिक्र से भरी वो आँखे , बहुत कुछ कह रही थी, मानों दोनों की आँखे एक दूसरे से बातें कर रही हों ) माँ - बेटा , मै वहाँ नही रहूँगी तेरे साथ, खुदका ख्याल रखना, टाइम पर खाना खा लेना.. थोड़ी भी तबियत खराब हो , तो दवाई ले लेना.. मुझे चिंता लगी रहेगी.. बेटी - माँ आप भी अपना ख्याल रखना, अब मै भी यहां नही रहूँगी..आपको और पापा क...