" तुम्हारी कमियों से भी इश्क़ करूँगा "

की उसके शब्द उस दिन थरथरा रहे थे, वो कुछ कहना चाहती थी, मगर कहने से झिझक रही थी||

शायद वो डर रही थी, इतना कि उसकी जुबाँ उसका साथ नही निभा रही थी और देखते ही देखते वो अपना होश खो बैठी, जैसे ही वो बेहोश होकर ज़मीं पर गिरी, लोगो ने दस बातें बनाना शुरू कर दिया, आखिर एक दुल्हन मंडप में बेहोश कैसे हो सकती है?? कहीं लड़की में कुछ खामी तो नही?? लड़की का चाल चलन तो ठीक हैं ना??

लोगों की बातें सुन दूल्हे ने सभी को चुप कराया, और दुल्हन को उठाकर अंदर ले गया||जैसे ही चेहरे पर पानी की छींटे पड़े तो कविता को होंश आया, उसकी आँखों के सामने उसका होने वाला पति परेश खड़ा था, परेश ने सवाल किया ~

" तुम ठीक तो हो?? क्या हो गया है तुम्हे?? कुछ बात है, परेशानी है तो मुझे बताओ ?? "

सहमी सी कविता ने जवाब दिया ~ " मुझमे कुछ कमियाँ हैं, जो आपको बताई नही गई हैं , मुझे एक बीमारी है, जिसमें में रोज़ होने वाली कई चीज़ें भूल जाती हूँ, कभी कभी तो इंसानो को भी, अभी मुझे सब याद है पर हो सकता है की कल सुबह मुझे कुछ याद ना रहे|| आप मुझसे शादी मत कीजिये वर्ना आपको मेरी इस बीमारी को झेलना पड़ेगा||  "

कविता से सच्चाई सुन, परेश कमरे से बाहर जाता है, और उसके पीछे कविता भी चल देती है, जैसे ही कविता बाहर आती है वो परेश को मंडप मे बेठा हुआ पाती है, परेश उसे मंडप में आने का इशारा करता है, और उससे शादी करता है, शादी होते है मौका देख कविता परेश से पूछती है ~"आपने मुझसे शादी क्यों की ?? "

जिसपर परेश कहता है ~ मुझे हमेशा से वो लड़की चाहिए थी, जो कभी अपनी कमियों पर पर्दा ना डाले, जो मुझसे सच कहे चाहे वो कितना भी कड़वा क्यूँ ना हो और तुम बिल्कुल वैसी ही हो, अब चाहे तुम मुझे कल भूल भी जाओ, मै तुम्हारा फिर भी ख्याल रखूँगा, तुम्हारी कमियों से भी इश्क़ करूँगा..

और इसी के साथ महूर्त आते ही कविता की अपने बाबुल के घर से विदाई हो गई...

#_Parul 

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